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सिंगर–एक्ट्रेस नंदिनी उपाध्याय की सफलता की कहानी : सपनों की नगरी में सुरीली उड़ान

मुंबई। माया नगरी मुंबई में हर दिन हजारों लोग अपने सपनों को साकार करने के इरादे से आते हैं। कोई यहां संघर्ष में खो जाता है, तो कोई अपनी मेहनत, लगन और प्रतिभा के दम पर सफलता के शिखर तक पहुंचता है। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है सिंगर व एक्ट्रेस नंदिनी उपाध्याय की, जो इन दिनों अपने काम और बढ़ती लोकप्रियता को लेकर चर्चा में हैं।

अपनी सुरीली आवाज और प्रभावशाली अभिनय के चलते नंदिनी उपाध्याय ने कम समय में ही दर्शकों के दिलों में खास जगह बना ली है। जब वह गाना गाती हैं, तो श्रोता मंत्रमुग्ध होकर उनकी आवाज़ में खो जाते हैं। सोशल मीडिया पर भी उनकी फैन फॉलोइंग लगातार बढ़ रही है, जो उनकी लोकप्रियता का साफ संकेत है।

मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले की रहने वाली नंदिनी उपाध्याय सपनों की नगरी मुंबई में अपनी किस्मत आजमाने पहुंचीं। मेहनत, अनुशासन और निरंतर अभ्यास का नतीजा यह रहा कि उन्हें एक के बाद एक अच्छे अवसर मिलते गए और उनका करियर निरंतर आगे बढ़ता चला गया।

बेहद आकर्षक व्यक्तित्व की धनी नंदिनी उपाध्याय अपनी सफलता का श्रेय अपने माता–पिता को देती हैं। उनका कहना है कि माता पूनम उपाध्याय और पिता हरिशंकर उपाध्याय के संस्कार, मार्गदर्शन और आशीर्वाद ने ही उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है। छोटे से शहर से निकलकर मुंबई तक का सफर तय करना आसान नहीं था, लेकिन परिवार का सहयोग हमेशा उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।

आने वाले समय में नंदिनी उपाध्याय के कई बड़े प्रोजेक्ट्स दर्शकों के सामने आने वाले हैं। जिस तरह से वह अपनी सुरीली आवाज़ और सशक्त अभिनय के दम पर आगे बढ़ रही हैं, उसे देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि वह दिन दूर नहीं जब नंदिनी उपाध्याय अपने हुनर के बल पर दर्शकों के दिलों पर राज करेंगी।

गौरतलब है कि सपनों की नगरी मुंबई में, जहां हर कोई अपनी-अपनी व्यस्तताओं में उलझा रहता है, नंदिनी उपाध्याय के इस सफर में उनके सहयोगी, उद्योगपति एवं समाजसेवी बाहुबली राहुल पांडे का भी विशेष योगदान रहा है। नंदिनी उपाध्याय ने अपने करियर में मिले इस सहयोग के लिए उनका आभार व्यक्त किया है।

सिंगर–एक्ट्रेस नंदिनी उपाध्याय की सफलता की कहानी : सपनों की नगरी में सुरीली उड़ान

Munazza Sabuwala, Who Is Rapidly Making Her Mark On The Journey From Model To Actress

Munazza Sabuwala, who is rapidly making her mark on the journey from model to actress, will soon be seen by audiences in several new and exciting projects. In the coming months, she will showcase her acting talent in a reality show, a music video, and a television serial.

Munazza began her career as a model, always prioritizing self-reliance. In her early days, she worked a job to avoid depending on anyone for her needs. She used her earnings to get her photoshoots done and create her portfolio. This self-belief and hard work propelled her forward.

Following this, Munazza consistently worked on modeling assignments, ramp walks, print shoots, and advertising campaigns. She won the Miss Pune title and received several awards. She participated in many prestigious modeling shows not only in India but also abroad, establishing a unique identity for herself. After making a strong presence in the modeling industry, she is now starting a new and powerful chapter in her career as an actress.

Munazza believes that “when we dream a dream or set a goal, we should continuously work hard to achieve it, because those who try never fail.” This mindset is the greatest strength behind her success.

Extremely self-respecting, confident, and multi-talented, Munazza says that if she weren’t an actress, she would have definitely made her mark as a model, anchor, or reporter. Besides acting and being comfortable in front of the camera, she is also an excellent tarot card reader. She loves learning new things, which makes her personality even more special.

When it comes to cinema, she is a big fan of Sanjay Leela Bhansali and Karan Johar. She is very much attracted to Nora Fatehi’s dance style, while Katrina Kaif and Kareena Kapoor are among her favorite actresses. She aspires to play lively roles like those in the film Jab We Met and strong characters like Jasmeet in Namaste London. Munazza Sabuwala is a perfect blend of struggle, confidence, and talent—she is not only living her dreams but also becoming an inspiration for others through her hard work.

  

Munazza Sabuwala, Who Is Rapidly Making Her Mark On The Journey From Model To Actress

तीन मिलियन व्यूज पार किया शिल्पी राज और माही श्रीवास्तव का वायरल भोजपुरी गाना ‘दिलवा में रखिहा’

फिल्म निर्माता रत्नाकर कुमार, भोजपुरी की फेमस सिंगर शिल्पी राज और भोजपुरी की बेस्ट एक्ट्रेस माही श्रीवास्तव की तीकड़ी नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है। जी हाँ! उनकी तिकड़ी में आया बिग ब्लास्ट भोजपुरी गाना ‘दिलवा में रखिहा’ रिलीज होते ही वायरल हो गया है और देखते ही देखते तीन मिलियन व्यूज यूट्यूब पर पार कर गया है। ये भोजपुरी गाना वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स भोजपुरी के ऑफिसियल यूट्यूब चैनल पर रिलीज होते ही वायरल हो गया है। इस गाने के तीन मिलियन क्लब में शामिल होने पर सिंगर शिल्पी राज और एक्ट्रेस माही श्रीवास्तव ने जश्न मनाया है। बता दें कि इस गाने को पिक्चराइजेशन काफी रिच और महँगे क्लब में किया गया है, जोकि भोजपुरी गानों की मेकिंग के लिए बहुत बड़ी बात है। इसके वीडियो में दिखाया है कि माही श्रीवास्तव लेदर की जैकेट और हाफ पैंट पहने किसी क्लब में जाती हैं, जहाँ पर हॉट लुक में बहुत लड़कियां नकाब पहने इतराते हुए नजर आ रही है। डिस्को म्यूजिक पर माही श्रीवास्तव  ठुमका लगाते हुए कहती हैं कि…

‘केतनो डेरवइबा राजा केतनो धमकइबा हो, आइब ना बात में केतनो फुलाइबा हो, रहे वाली नइखे तोहसे डर के पिया, जदि चाही ले भलाई अपना घर के पिया, त दिलवा में रखिहा मेहर के पिया, न त मरि जाइब कुछ करिके पिया, त दिलवा में रखिहा मेहर के पिया…’

वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स प्रस्तुत भोजपुरी गाना ‘दिलवा में रखिहा’ के निर्माता रत्नाकर कुमार हैं। इस गीत को सिंगर शिल्पी राज ने अलग अंदाज में गाया है।  एक्ट्रेस माही श्रीवास्तव ने वेस्टर्न और इंडियन लुक में अपनी कातिल अदाओं का जलवा बिखेरा है। डायरेक्शन टीम रावये फिल्म्स, डांसर्स लुक मनीषा टांक, आर्टिस्ट मेकअप इंद्रजीत दास, हेयर पीहू का है। आर्ट डायरेक्टर सोनू एसके, असिस्टेंट डायरेक्टर रवि थापा, रजत वैद और रितिका बीटीएस और स्टिल फोटोग्राफर सौरव हैं। लोकेशन एच एल वी फिल्म सिटी, कॉस्ट्यूम रजत मनचंदा का है।

इस गीत को लेकर सिंगर शिल्पी राज ने कहा कि ‘जब इस सांग को गाने आफर मेरे पास आया था तो इस गाने का बोल सुनकर तभी मुझे लगा था कि ये गाना तो हिट है बॉस। अब ये सांग ऑडियंस भर-भर कर अपना प्यार दे रहे हैं, इसके लिए सभी को दिल से थैंक्यू, साथ ही इतना बेस्ट सांग बनाने के लिए रत्नाकर कुमार सर को तहेदिल धन्यवाद!’

एक्ट्रेस माही श्रीवास्तव ने कहा कि ‘मनोरंजन से भरपूर यह लोकगीत तीन मिलियन व्यूज यूट्यूब पर पार कर गया है, यह मेरे लिए किसी जश्न से कम नहीं है। इस बिग ब्लास्ट भोजपुरी गाना में परफॉर्म करके मुझे बहुत खुशी मिली है। इतना बढ़िया लोकगीत बनाने के लिए रत्नाकर कुमार सर को दिल से धन्यवाद देती हूँ और भरपूर प्यार देने के लिए सभी ऑडियंस को दिल से धन्यवाद देती हूँ।’

तीन मिलियन व्यूज पार किया शिल्पी राज और माही श्रीवास्तव का वायरल भोजपुरी गाना ‘दिलवा में रखिहा’

Global Sovereignty Index Flags India’s Cognitive Deficit, Sparks Urgent Debate on Education and Knowledge Autonomy

India, December 16, 2025:  The release of the world’s first Sovereignty Index by the International Burke Institute, assessing all UN member states across political, economic, technological, informational, cultural, cognitive, and military dimensions, has sparked urgent debate on India’s education and knowledge autonomy.  Early findings on cognitive sovereignty have placed India under the spotlight.

The Index, unveiled on December 14, indicates that despite India’s demographic strength and economic momentum, the country needs further structural reforms to improve its ability to independently produce knowledge, nurture critical thinking, and control its intellectual and digital ecosystems. As per International Burk Institute ranking India occupies 24th rank in overall Index, however in  Cognitive Sovereignty Index, the country ranks 130th out of 193 countries.

The findings have triggered sharp commentary from education and knowledge-system experts. Commenting on India’s ranking, Priyanka Yadav, Vice President of ONEFUTURE and Director of Educational Policy Research for India–Israel Cooperation, and Gabriel Mart, Scientific Secretary of the International Burke Institute, argued that cognitive sovereignty needs to be treated as a national priority as it plays a crucial role in shaping ideas, narratives, and innovation in an increasingly competitive global order.

The Sovereignty Index evaluates how effectively nations cultivate independent thinking, critical reasoning, and control over their own knowledge ecosystems.  According to the Institute’s findings, India’s cognitive sovereignty indicators lag behind its economic and geopolitical ambitions, exposing vulnerabilities in education systems, digital knowledge infrastructure, and intellectual autonomy.

Commenting on the findings, Priyanka Yadav, an expert on education reform and cognitive sovereignty, said, “When a nation does not shape its own knowledge systems, it gradually surrenders its ability to shape its future. India needs to bridge sovereignty gap urgently.”

Post-pandemic assessments across multiple Indian states reveal that foundational learning outcomes remain weak, with large numbers of children unable to read or comprehend age-appropriate material. At the higher education level, skill-based studies show that only a fraction of graduates demonstrate critical reasoning and applied problem-solving abilities. Together, these indicators suggest a systemic issue rather than isolated failures.

Yadav emphasized that the roots of the challenge are historical as much as institutional. “India’s education structure still carries the imprint of colonial-era designs that prioritized compliance over curiosity. We have reformed policies and curricula over time, but the deeper architecture of how minds are trained has not fully shifted toward intellectual independence,” she said.

Gabriel Mart, an Israeli global public health researcher and Scientific Secretary of the International Burke Institute echoed this concern from a global perspective. “India possesses immense demographic and intellectual capital. Yet its education and information systems often reward rote performance rather than inquiry. Cognitive sovereignty depends on the ability to question, critique, and generate original knowledge — not simply to absorb it,” he said.

The Burke Institute’s analysis contrasts India’s trajectory with examples such as Uruguay, a smaller nation that has deliberately invested in cognitive infrastructure. Through its long-running Plan Ceibal initiative, Uruguay combined universal digital access with curriculum redesign, media literacy, and institutional autonomy. The result has been near-universal internet penetration, strong research concentration, and a population better equipped to navigate complex information environments.

For India, the irony is profound. Long before modern sovereignty indices existed, the subcontinent was a global center of cognitive autonomy. Ancient universities such as Nalanda, Takshashila, and Vikramashila attracted scholars from across Asia, operating as hubs of original research in philosophy, medicine, mathematics, astronomy, and statecraft. These institutions thrived on curricular freedom, pluralistic debate, and rigorous inquiry — principles that modern systems now seek to rediscover.

“India once exported knowledge rather than importing frameworks. Its scholars controlled both what was taught and how truth was evaluated. That is the essence of cognitive sovereignty,” Mart said.

The experts pointed out that colonial interventions dismantled much of this indigenous knowledge infrastructure, redirecting education toward administrative utility and epistemic dependence. According to Yadav, the long-term impact has been a shift from knowledge production to consumption. “What we see today is not just underinvestment in schools or technology. It is the cumulative effect of epistemic disruption that reduced India’s control over its own intellectual agenda,” she emphasized.

India’s National Education Policy (NEP) 2020 represents a meaningful attempt to reverse this trend by emphasizing multidisciplinary learning, critical thinking, and linguistic diversity. Both experts acknowledge its promise, while cautioning that policy intent must be matched by systemic reform in assessments, teacher training, and institutional incentives.

Beyond classrooms, the Burke Index flags emerging digital vulnerabilities. Limited household internet access, uneven teacher readiness in information and communication technologies, and reliance on foreign-controlled digital platforms raise concerns about who ultimately shapes India’s information environment.

“When a nation’s cognitive space is governed externally, sovereignty is diluted. This is not merely a technology issue; it is a strategic one,” Mart warned.

As the full Sovereignty Index is out now, experts stressed that India’s findings should be read not as a verdict, but as a call to action. With the world’s youngest population and a rich intellectual heritage, India has the capacity to reclaim cognitive leadership — provided it treats intellectual autonomy as a core pillar of national strategy.

“India’s future will be written not only in economic figures or diplomatic statements. Reclaiming cognitive sovereignty is not nostalgia — it is necessity,” Yadav concluded.

About the Authors

Gabriel Mart

Israeli global public health researcher and Scientific Secretary at the International Burke Institute, specializing in knowledge systems.

Priyanka Yadav

Vice President of ONEFUTURE; Director of Educational Policy Research for India–Israel Cooperation. Senior policy researcher focused on cognitive sovereignty, educational reform, and international collaboration in knowledge systems.

 

Global Sovereignty Index Flags India’s Cognitive Deficit, Sparks Urgent Debate on Education and Knowledge Autonomy

 

देशभर में कई बड़े वित्तीय मामले सुलझा रही है विनय कुमार दुबे की VKDL NPA Advisory Council

नई दिल्ली / मुंबई: देश में तेजी से बढ़ते Non-Performing Assets (NPA) आज बैंकिंग और वित्तीय व्यवस्था के लिए एक गंभीर चुनौती बने हुए हैं। ऐसे समय में वित्तीय समाधान के क्षेत्र में एक भरोसेमंद नाम बनकर उभरी है विनय कुमार दुबे के नेतृत्व वाली VKDL NPA Advisory Council, जिसने अपनी विशेषज्ञता और रणनीतिक कार्यप्रणाली के माध्यम से देशभर में कई बड़े और जटिल एनपीए मामलों को सफलतापूर्वक सुलझाया है।

VKDL NPA Advisory Council ने बैंक, वित्तीय संस्थानों और व्यापारियों के बीच संतुलन बनाते हुए ऐसे समाधान प्रस्तुत किए हैं, जिनसे न केवल बकाया वसूली संभव हुई है, बल्कि प्रभावित व्यापारियों को भी दोबारा वित्तीय स्थिरता प्राप्त करने का अवसर मिला है। परिषद का कार्य केवल वसूली तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाधान-आधारित और पुनर्वास-केंद्रित दृष्टिकोण पर काम करती है।

अनुभवी टीम और रणनीतिक दृष्टिकोण

VKDL की टीम में अनुभवी बैंकिंग विशेषज्ञ, वित्तीय सलाहकार, कानूनी विशेषज्ञ और डेटा-एनालिस्ट शामिल हैं, जो एनपीए से जुड़े मामलों का गहन अध्ययन कर डेटा-आधारित और कानूनी रूप से सुदृढ़ रणनीति तैयार करते हैं। परिषद की कार्यशैली में समयबद्ध निर्णय, पारदर्शिता और बैंकिंग कानूनों की गहरी समझ प्रमुख भूमिका निभाती है।

परिषद द्वारा SARFAESI Act, ऋण पुनर्गठन, One Time Settlement (OTS), वसूली प्रक्रिया, वित्तीय विवाद समाधान और बैंक-ग्राहक समन्वय जैसे विषयों पर विशेष रूप से काम किया जाता है। इसी कारण उच्च मूल्य और लंबे समय से अटके मामलों में भी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

व्यापारी, बैंक और सरकार—तीनों के हितों का संरक्षण

VKDL NPA Advisory Council का मानना है कि एनपीए समस्या का समाधान तभी स्थायी हो सकता है जब व्यापारी, वित्तीय संस्थान और सरकार—तीनों के हित सुरक्षित रहें। परिषद का उद्देश्य केवल बकाया राशि की वसूली नहीं, बल्कि व्यापारियों को जागरूक करना, सही वित्तीय योजना बनाना और उन्हें अपनी संपत्ति गंवाए बिना समाधान तक पहुँचाना है।

देशभर में विस्तार

वर्तमान में VKDL केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि मुंबई, लखनऊ, बेंगलुरु, कोलकाता सहित देश के कई प्रमुख शहरों में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। विभिन्न राज्यों में फैले अपने मजबूत नेटवर्क के माध्यम से परिषद छोटे, मध्यम और बड़े—हर स्तर के एनपीए मामलों को दक्षता के साथ निपटा रही है।

जागरूकता के लिए कॉन्फ्रेंस और मीटिंग

VKDL NPA Advisory Council समय-समय पर विभिन्न राज्यों में कॉन्फ्रेंस, सेमिनार और इंटरएक्टिव मीटिंग्स का आयोजन भी करती है, ताकि व्यापारी और आम लोग एनपीए मामलों की जटिलताओं को समझ सकें। इन कार्यक्रमों के माध्यम से यह बताया जाता है कि किस प्रकार सही समय पर और सही प्रक्रिया अपनाकर बकाया भुगतान किया जा सकता है और कानूनी परेशानियों से बचा जा सकता है।

चेयरमैन का बयान

VKDL के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर विनय कुमार दुबे ने बताया कि,  “हमारा प्रयास है कि एनपीए मामलों का समाधान ऐसे तरीके से हो, जिससे व्यापारी भी दोबारा खड़े हो सकें, वित्तीय संस्थानों को उनकी राशि समय पर मिले और सरकार को भी उचित राजस्व प्राप्त हो। हमारी अनुभवी टीम और देशभर में फैला नेटवर्क हमें हर पैमाने के मामलों को सफलतापूर्वक निपटाने में सक्षम बनाता है।”

भविष्य की योजनाएँ

VKDL NPA Advisory Council आने वाले वर्षों में और अधिक जटिल और उच्च-मूल्य वाले एनपीए मामलों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की दिशा में अग्रसर है। परिषद का लक्ष्य है कि भारत की वित्तीय व्यवस्था को मजबूत करने में वह एक सशक्त और भरोसेमंद साझेदार के रूप में उभरे।

देशभर में कई बड़े वित्तीय मामले सुलझा रही है विनय कुमार दुबे की VKDL NPA Advisory Council

रत्नाकर कुमार, शिल्पी राज और माही श्रीवास्तव का भोजपुरी गाना ‘दिलवा में रखिहा’ पार किया एक दिन में दो मिलियन व्यूज

भोजपुरी की फेमस सिंगर शिल्पी राज और भोजपुरी की बेस्ट एक्ट्रेस माही श्रीवास्तव की सुपरहिट जोड़ी में रिलीज हुआ बिग ब्लास्ट भोजपुरी गाना ‘दिलवा में रखिहा’ एक दिन में दो मिलियन व्यूज पार कर गया है। ये भोजपुरी गाना वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स भोजपुरी के ऑफिसियल यूट्यूब चैनल पर रिलीज होते ही वायरल हो गया है। इस गाने के दो मिलियन क्लब में शामिल होने पर सिंगर शिल्पी राज और एक्ट्रेस माही श्रीवास्तव ने जश्न मनाया है। बता दें कि इस गाने को पिक्चराइजेशन काफी रिच और महँगे क्लब में किया गया है, जोकि भोजपुरी गानों की मेकिंग के लिए बहुत बड़ी बात है। इसके वीडियो में दिखाया है कि माही श्रीवास्तव लेदर की जैकेट और हाफ पैंट पहने किसी क्लब में जाती हैं, जहाँ पर हॉट लुक में बहुत लड़कियां नकाब पहने इतराते हुए नजर आ रही है। डिस्को म्यूजिक पर माही श्रीवास्तव  ठुमका लगाते हुए कहती हैं कि…

‘केतनो डेरवइबा राजा केतनो धमकइबा हो, आइब ना बात में केतनो फुलाइबा हो, रहे वाली नइखे तोहसे डर के पिया, जदि चाही ले भलाई अपना घर के पिया, त दिलवा में रखिहा मेहर के पिया, न त मरि जाइब कुछ करिके पिया, त दिलवा में रखिहा मेहर के पिया…’

वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स प्रस्तुत भोजपुरी गाना ‘दिलवा में रखिहा’ के निर्माता रत्नाकर कुमार हैं। इस गीत को सिंगर शिल्पी राज ने अलग अंदाज में गाया है।  एक्ट्रेस माही श्रीवास्तव ने वेस्टर्न और इंडियन लुक में अपनी कातिल अदाओं का जलवा बिखेरा है। डायरेक्शन टीम रावये फिल्म्स, डांसर्स लुक मनीषा टांक, आर्टिस्ट मेकअप इंद्रजीत दास, हेयर पीहू का है। आर्ट डायरेक्टर सोनू एसके, असिस्टेंट डायरेक्टर रवि थापा, रजत वैद और रितिका बीटीएस और स्टिल फोटोग्राफर सौरव हैं। लोकेशन एच एल वी फिल्म सिटी, कॉस्ट्यूम रजत मनचंदा का है।

इस गीत को लेकर सिंगर शिल्पी राज ने कहा कि ‘जब इस सांग को गाने आफर मेरे पास आया था तो इस गाने का बोल सुनकर तभी मुझे लगा था कि ये गाना तो हिट है बॉस। अब ये सांग ऑडियंस भर-भर कर अपना प्यार दे रहे हैं, इसके लिए सभी को दिल से थैंक्यू, साथ ही इतना बेस्ट सांग बनाने के लिए रत्नाकर कुमार सर को तहेदिल धन्यवाद!’

एक्ट्रेस माही श्रीवास्तव ने कहा कि ‘मनोरंजन से भरपूर यह लोकगीत दो मिलियन व्यूज यूट्यूब पर पार कर गया है, यह मेरे लिए किसी जश्न से कम नहीं है। इस बिग ब्लास्ट भोजपुरी गाना में परफॉर्म करके मुझे बहुत खुशी मिली है। इतना बढ़िया लोकगीत बनाने के लिए रत्नाकर कुमार सर को दिल से धन्यवाद देती हूँ और भरपूर प्यार देने के लिए सभी ऑडियंस को दिल से धन्यवाद देती हूँ।’

रत्नाकर कुमार, शिल्पी राज और माही श्रीवास्तव का भोजपुरी गाना ‘दिलवा में रखिहा’ पार किया एक दिन में दो मिलियन व्यूज

शाहजहांपुर के देव करन सिंह को मिला वेबसीरीज सार्या में मुख्य किरदार

एक्टर देव करन वेबसीरीज सार्या में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, देव करन ने बताया कि इस से पहले उन्होंने कई बार ऑडिशन दिया लेकिन सफलता नहीं मिली इसके बाद देव करन ने एक्टिंग क्लास ज्वाइन किया एक्टिंग की बारीकियां सीखीं और अब वेबसीरीज सार्या में अपने टैलेंट को दिखाने का मौका मिला है देव करन ने बताया कि अगर आप के अन्दर टैलेंट है तो आप को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता और इसी वजह से पहले एक्टिंग की बारीकियां सीखीं और अब वेबसीरीज सार्या में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं शाहजहांपुर के रहने वाले देव करन बहुत जल्द ही रुपहले पर्दे पर नजर आएंगे

जो बहुत बड़े ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होगी इस प्रोजेक्ट को लेकर बहुत उत्साहित है और उन्हें पूरी उम्मीद है कि इस प्रोजेक्ट के बाद वो एक अलग पहचान बना पाएंगे

परिवार की उम्मीदों को पूरा करना ही जीवन का लक्ष्य रखा है यहां तक पहुंचने में पिता निर्मल सिंह का बहुत बड़ा योगदान है जो इस प्रोजेक्ट के मिलने से पूरा होता दिख रहा है

रीगल फिल्म्स द्वारा बन रही इस वेबसरीज़ के निर्माता निर्देशक विनोद कुमार ने बताया कि इस प्रोजेक्ट की शुटिंग दिल्ली और मुंबई में होगी इससे पहले भी निर्माता निर्देशक विनोद कुमार बहुत सारे फिल्म व टीवी सीरियलों का निर्माण कर चुके हैं आज वेबसीरीज के चलन के युग में उनकी जाल भी दर्शकों को पसंद आएगी

 

शाहजहांपुर के देव करन सिंह को मिला वेबसीरीज सार्या में मुख्य किरदार

निर्माता हरि नारायण चौरसिया की हॉरर–कॉमेडी फिल्म ‘सिहरन’ पूरे भारत में रिलीज

“चोटी कटवा चुड़ैल” का आतंक अब सिनेमा घरों में

मुंबई । ओम शिवाय फिल्म्स के बैनर तले बनी बहुचर्चित हॉरर–कॉमेडी फिल्म सिहरन अब पूरे भारत के सिनेमा घरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म का ऑफिशियल ट्रेलर रेड बल्ब स्टूडियो से 10 तारीख को वर्ल्डवाइड लॉन्च किया गया था, जिसे दर्शकों से शानदार प्रतिक्रिया मिली।

फिल्म के निर्माता हरि नारायण चौरसिया ने बताया कि सिहरन एक जबरदस्त हॉरर और कॉमेडी का कॉम्बिनेशन है, जिसमें डर के साथ-साथ भरपूर मनोरंजन और एक सशक्त सामाजिक संदेश भी दिया गया है।

इस फिल्म की मुख्य अभिनेत्री आराधना सचान हैं, जबकि प्रमुख भूमिकाओं में अभिषेक शर्मा, जितेंद्र यादव और मधुश्री शाह नजर आ रहे हैं। फिल्म का  लेखन, कहानी, स्क्रीनप्ले और निर्देशन मनीष कुमार वर्मा द्वारा किया गया है, जिन्होंने हॉरर-कॉमेडी के साथ-साथ दमदार एक्शन को भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।

फिल्म की कहानी में पान की खेती का विशेष कॉन्सेप्ट शामिल किया गया है, जो निर्माता हरि नारायण चौरसिया के सुझाव पर रखा गया। कृषक समाज से जुड़े पान उत्पादकों की समस्याओं, उनके व्यवसाय और छोटे गांवों से लेकर बड़े शहरों तक होने वाले शोषण को फिल्म में सशक्त रूप से दिखाया गया है।

फिल्म की सह-निर्माता आभा चौरसिया ने बताया कि यह फिल्म ग्रामीण परिवेश में फैली रूढ़िवादी सोच, महिलाओं के बीच रंगभेद और सामाजिक भेदभाव जैसे मुद्दों को उठाती है। यह फिल्म नारी सशक्तिकरण पर आधारित है और यह संदेश देती है कि यदि महिला ठान ले, तो वह हर कठिनाई को पार कर सकती है।

फिल्म में निर्माता की सुपुत्री प्रियंशी चौरसिया ने एक न्यूज रिपोर्टर की भूमिका निभाई है। उन्होंने बताया कि उन्हें फिल्म की कहानी बेहद पसंद आई और इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनना उनके लिए यादगार अनुभव रहा। वहीं डॉ. आकांक्षा गांव की महिला नीलिमा के किरदार में दमदार अभिनय करती नजर आती हैं।

इस फिल्म की कास्टिंग डायरेक्टर और प्रोजेक्ट हेड भी आराधना सचान हैं, जिन्होंने अभिनय के साथ-साथ अपनी जिम्मेदारियों को भी बखूबी निभाया है।

फिल्म के सिनेमेटोग्राफर राज यादव हैं, जिनके कैमरा वर्क ने फिल्म को शानदार विज़ुअल टच दिया है।

फिल्म का एक्शन बीर मास्टर द्वारा डिजाइन किया गया है, जो पूरी तरह साउथ फिल्मों के स्तर का दमदार एक्शन दर्शाता है। सतना और छतरपुर जैसे क्षेत्रों में फिल्माई गई इस फिल्म में दर्शकों को भरपूर एक्शन और थ्रिल देखने को मिलेगा।

फिल्म में कुल चार खूबसूरत गाने हैं, जिनका संगीत डब्लू साहिस ने दिया है और जिन्हें अनुष्का बैनर्जी ने अपनी मधुर आवाज़ में गाया है। बैकग्राउंड म्यूजिक अनिकेत भारद्वाज और संकेत गुंडेकर का है। आर्ट डायरेक्शन सीपी सेन और असिस्टेंट आर्ट डायरेक्टर रवि रंगीला ने संभाला है, जबकि मेकअप का कार्य गुड्डू गोल्डन ने किया है।

निर्माता हरि नारायण चौरसिया ने जानकारी दी कि फिल्म की शूटिंग 15 अक्टूबर 2023 से शुरू होकर लगभग 30 दिनों तक चली। फिल्म के प्रमुख दृश्य खजुराहो जिले के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल अतरा सरकार जी के हनुमान मंदिर, आसपास के जंगलों और विभिन्न लोकेशनों पर फिल्माए गए हैं।

फिल्म में ध्रुव सिंह बघेल भी अहम किरदार में नजर आते हैं, जबकि दुर्गेश कुमार एक महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक भूमिका में दिखाई देते हैं। इस फिल्म में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और मुंबई के लगभग 80–90 कलाकारों और तकनीकी सहयोगियों ने योगदान दिया है।

निर्माता हरि नारायण चौरसिया ने फिल्म में एसोसिएट डायरेक्टर की भूमिका के साथ-साथ पुलिस इंस्पेक्टर अजय नायक का किरदार भी निभाया है। छतरपुर जिले के कई कलाकारों ने भी फिल्म में अहम भूमिकाएँ निभाई हैं, जिनमें विधायक की भूमिका में राजेश महंतो विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।

इससे मूवी से  पहले निर्माता हरि नारायण चौरसिया विंध्य की विरासत नाम की डॉक्यूमेंट्री के 52 एपिसोड बना चुके है  जो कि दूरदर्शन चैनल पर टेलीकास्ट हो चुके है ।

जिसके लिए उन्हें उनके काम की बहुत  सराहना  मिली । उन्होंने पान पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाई थी ।

फिल्म की शूटिंग मध्य प्रदेश की खूबसूरत लोकेशनों जैसे गढ़ी मल्हरा, आसपास के गांव, छतरपुर शहर, सतना, माधौगढ़ का किला और ए.के.एस. यूनिवर्सिटी में की गई है। फिल्म में सतना, छतरपुर, रीवा, इंदौर, इटारसी, ग्वालियर, मुंबई और उत्तर प्रदेश के कलाकारों को अवसर दिया गया है।

फिल्म में बॉलीवुड कलाकार मुस्ताक खान और जूनियर मेहमूद ने कॉमेडी रोल निभाकर दर्शकों को खूब हंसाया है, जबकि मुख्य विलेन की भूमिका सत्यम शुक्ला ने निभाई है। अन्य प्रमुख कलाकारों में विजय मानवतकर, अजय श्रीवास्तव, नीरज सिंह राजपूत, के.एल. रंधावा, प्रताप वर्मा, अंजू रस्तोगी सहित कई नाम शामिल हैं।

फिल्म में योगदान देने वाले अन्य कलाकार एवं सहयोगी

अतुल वत्सल, ब्रिज किशोर पटेल, राजू हरसाना, अब्दुल गफ्फार, ममता सिंह, सोनिया राजपूत, हैरी ओबेरॉय, दुर्गेश अवस्थी, तारिक बारिशी, विवेक सिंह, संजय साहनी, रवि रंगीला, योगिता कोइराला, मीरा मंडल, सोनिया आर. के. गोस्वामी, जैतोष कुमार, राम जायसवाल, सत्यम, मोनू, सोनू डगुपुरिया, विकास नरवरिया , राजू सोनी  सहित कई कलाकारों ने इस फिल्म में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

फिल्म का पैन-इंडिया डिस्ट्रीब्यूशन पिकल एंटरटेनमेंट  द्वारा किया गया है।

निर्माता हरि नारायण चौरसिया ने बताया कि 12 दिसंबर से रिलीज हुई यह फिल्म सिनेमा घरों में अच्छा प्रदर्शन कर रही है।

दर्शकों से अपील है कि वे अपने नज़दीकी सिनेमा हॉल में जाकर हॉरर-कॉमेडी फिल्म ‘सिहरन’ का आनंद अवश्य लें।

निर्माता हरि नारायण चौरसिया की हॉरर–कॉमेडी फिल्म ‘सिहरन’ पूरे भारत में रिलीज

पटना में मेडिकल क्रांति, Dr. राजीव सिंह ने लॉन्च की बिना घुटना प्रत्यारोपण वाली आधुनिक तकनीक

पटना। बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई देने वाले डॉक्टरों की सूची में अगर सबसे भरोसेमंद नाम किसी का है तो वह है साईं हेल्थ केयर वैलनेस सेंटर के संस्थापक और बिहार के सुप्रसिद्ध दर्द रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव सिंह। मरीजों के लिए सहज उपलब्धता, मानवीय व्यवहार और अत्याधुनिक उपचार—इन तीनों गुणों ने डॉ. सिंह को बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्वी भारत में एक जाना-माना नाम बना दिया है।

सालों से वे न सिर्फ इलाज करते आए हैं बल्कि हर साल सैकड़ों मरीजों को मुफ्त चिकित्सा देकर समाजिक जिम्मेदारी भी निभाते हैं। यही कारण है कि आज भी दर्द से परेशान कोई भी मरीज सबसे पहले साईं हेल्थ केयर का नाम लेता है।

नई तकनीक – बिना सर्जरी, बिना घुटना बदले इलाज

इस बार डॉ. राजीव सिंह ने अपने सेंटर में एक ऐसी मशीन जोड़ी है जो बिहार में चिकित्सा जगत के लिए किसी क्रांति से कम नहीं है। यह मशीन है Knee Decompression Machine, जो घुटनों में नेचुरल गैप (Joint Space) बनाकर दर्द को जड़ से खत्म करती है और बिना घुटना प्रत्यारोपण (Knee Replacement) किए ही घुटनों के गंभीर से गंभीर रोगों का इलाज कर देती है।

तकनीक की बड़ी खासियतें: बिना ऑपरेशन, बिना इंजेक्शन, बिना घुटना बदले, बिना दर्द, घुटनों में स्वाभाविक गैप बनाकर तुरंत राहत

विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक उन मरीजों के लिए वरदान है जिनकी हड्डियों में लंबे समय से दर्द रहता है या जिनकी उम्र बढ़ने के साथ घुटनों में समस्या बढ़ गई है।

चाहे सर्वाइकल (गर्दन दर्द), हील पेन (एड़ी दर्द), लम्बर (पीठ दर्द), जोड़ों का पुराना दर्द, या घुटनों की जकड़न और सूजन—

इस मशीन के जरिए डॉ. सिंह ने कई मरीजों का ऐसा इलाज किया है कि वे सालों पुराना दर्द भूलकर दोबारा सामान्य जीवन जीने लगे हैं।

डॉ. सिंह का मानना है कि मरीज को आराम मिलना चाहिए। वे कहते हैं: दर्द दिखता नहीं है, लेकिन किसी का जीवन रोक देता है। अगर तकनीक से बिना सर्जरी राहत मिल सकती है तो उसे मरीज तक पहुंचाना मेरी जिम्मेदारी है।

साईं हेल्थ केयर वैलनेस सेंटर बिहार का पहला ऐसा संस्थान है जहां यह अत्याधुनिक Knee Decompression Machine स्थापित की गई है। सालों की सेवा, हजारों सफल केस और समाजिक कार्यों में निरंतर योगदान के लिए डॉ. राजीव सिंह को कई राष्ट्रीय सम्मान भी प्राप्त हुए हैं।

पटना में मेडिकल क्रांति, Dr. राजीव सिंह ने लॉन्च की बिना घुटना प्रत्यारोपण वाली आधुनिक तकनीक

स्पिक मैके (SPIC MACAY) मुंबई के स्कूलों और कॉलेजों में 150 सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करेगी

मुंबई, 14 दिसंबर, 2025 — स्पिक मैके (सोसाइटी फॉर द प्रमोशन ऑफ इंडियन क्लासिकल म्यूजिक एंड कल्चर अमंगस्ट यूथ) मुंबई चैप्टर के संस्थापक और पद्मश्री पुरस्कार विजेता डॉ. किरण सेठ हाल ही में शहर के दौरे पर आए थे। डॉ. सेठ ने कम उम्र में ही युवा छात्रों को भारत की समृद्ध शास्त्रीय कलाओं और योग से परिचित कराने की महत्वपूर्ण भूमिका पर ज़ोर दिया, और बताया कि कैसे ये अभ्यास एकाग्रता, धैर्य और आंतरिक अनुशासन को बढ़ा सकते हैं, जिससे वे शिक्षा, उद्योग और अपने चुने हुए किसी भी करियर पथ में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकेंगे।

हाल ही में नालंदा पब्लिक स्कूल, मुलुंड में आयोजित एक कार्यक्रम और प्रेस कॉन्फ्रेंस में, जिसमें पंडित सतीश व्यास (पद्मश्री पुरस्कार विजेता और संतूर कलाकार), उस्ताद कमाल साबरी (सारंगी उस्ताद) और उस्ताद राजा मियां (हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक) और पंडित रोनू मजूमदार (पद्मश्री पुरस्कार विजेता और बांसुरी वादक) जैसे भारतीय शास्त्रीय संगीत के दिग्गज शामिल हुए, डॉ. सेठ ने अपना विज़न साझा किया।

शहर के अपने दौरे के दौरान, डॉ. सेठ ने IIT बॉम्बे, SBI पेमेंट्स टीम के साथ बातचीत की, रोटरी क्लब इंटरनेशनल और डिस्ट्रिक्ट गवर्नर्स एवं शहर के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों जैसे पिल्लई यूनिवर्सिटी, न्यू पनवेल से मुलाकात की।

इसी विज़न के तहत, उन्होंने जनवरी और मार्च 2026 के बीच मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन के स्कूलों और कॉलेजों में लगभग 150 शास्त्रीय कला कार्यक्रम आयोजित करने की एक व्यापक योजना की घोषणा की। इस पहल में नगर निगम, सहायता प्राप्त और निजी शैक्षणिक संस्थान शामिल होंगे, और इसमें लेक्चर-डेमोंस्ट्रेशन, वर्कशॉप और कॉन्सर्ट शामिल होंगे, जिसका उद्देश्य हजारों युवा दिमागों को प्रेरित करना है। इस पहल को SBI पेमेंट्स जैसे भागीदारों का सपोर्ट प्राप्त है, साथ ही SRF जैसे अन्य भी हैं, जो युवाओं के बीच भारत की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के लिए SPIC MACAY की प्रतिबद्धता को साझा करते हैं।

दुनिया भर में फैली मानसिक बीमारियों के मुद्दे को संबोधित करते हुए डॉ. सेठ ने एक बढ़ती हुई वैश्विक चिंता पर प्रकाश डाला: “हर जगह छात्र चिंता, तनाव और अवसाद की महामारी का सामना कर रहे हैं। कई लोग अपने मन को नियंत्रित करने और ध्यान केंद्रित करने के लिए संघर्ष करते हैं, वे लगातार तनाव में रहते हैं, चिंतित रहते हैं और ध्यान केंद्रित करने में असमर्थ होते हैं, जिससे अवसाद होता है, जिस से शैक्षणिक परिणाम खराब होते हैं। हमारा शास्त्रीय संगीत और योग, अगर स्कूलों में पेश किया जाए – भले ही छात्र सिर्फ सुनें – तो इन समस्याओं को कम करने और शिक्षा और वे जिस भी क्षेत्र में आगे बढ़ते हैं, उसमें बेहतर परिणाम लाने में मदद मिल सकती है।”

मुंबई में शुरू की गई इस पहल की एक महत्वपूर्ण पृष्ठभूमि एसपीआईसी मैके के संस्थापक-अध्यक्ष डॉ. किरण सेठ द्वारा वर्ष 2024 में पूरी की गई अखिल भारतीय एकल साइकिल यात्रा है। इस यात्रा के दौरान, डॉ. सेठ ने 200 से अधिक राज्यों, शहरों, कस्बों और गांवों में 14000 किलोमीटर की दूरी तय की और छात्रों, शिक्षकों, स्वयंसेवकों और स्थानीय समुदायों के साथ संवाद स्थापित किया। इस साइकिल यात्रा का उद्देश्य शिक्षा में संस्कृति की भूमिका के बारे में जागरूकता बढ़ाना, शारीरिक फिटनेस, पर्यावरण के प्रति उत्तरदायित्व और सादा जीवन शैली को प्रोत्साहित करना और इस विचार को रेखांकित करना था कि सांस्कृतिक जागरूकता जिम्मेदार नागरिकता का अभिन्न अंग है।

इस पहल के बारे में बात करते हुए, स्पीक मैके के पूर्व राष्ट्रीय सचिव सब्यसाची डे ने कहा, “स्पीक मैके मुंबई चैप्टर का उद्देश्य इस पहल के माध्यम से शहर के सभी छात्रों और बच्चों तक पहुंचना है। हमें उम्मीद है कि इस पहल से हर बच्चा और छात्र महाराष्ट्र राज्य और शहर के सभी शिक्षण संस्थानों में हमारी शास्त्रीय कलाओं और विरासत में निहित सूक्ष्मता, सुंदरता, अमूर्तता, धैर्य और मूल्यों की सराहना करेगा।”

 

स्पिक मैके (SPIC MACAY) मुंबई के स्कूलों और कॉलेजों में 150 सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करेगी